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गांगियासर राय माता शक्तिपीठ की अदभूत शक्ति

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  जिले के गांव गांगीयासर का रायमाता का मंदिर हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे व शौहार्द का प्रतिक है. नवरात्रा के समय यहां हिन्दू के साथ साथ हजारों की संख्या मे मुस्लिम समाज के लोग भी दर्शन करने आते है. ये मन्दिर अपनी एक अलग पहचान रखता है, रायमाता के यहां मान्यता है कि जो भी मन से मन्नत मांगता है वह जरूर पूर्ण होती है. अष्ठमी पर लगने वाले मेले में मुस्लिम समाज के लोगों के द्वारा कुश्ती का आयोजन करवाया जाता है. कुश्ती में भाग लेने के लिये राजस्थान के साथ हरियाणा, दिल्ली और पंजाब से भी पहलवान आते है. झुंझुनू जिला सैना के साथ साथ धार्मिक स्थलों के लिय भी अपनी अलग पहचान रखता है.  साथ जिले में बहुत मान्यता रखने वाले शक्तिपीठ स्थापित है, इन शक्तिपीठ मे गांगियासर की रायमाता की शक्तिपीठ अपनी अलग वैभवशाली परंपरा को कायम रखे हुए है. यहां की मान्यता है कि यहां जो भी सचे मन से मनोकामना मांगी जाती है वह मुराद जरूर पूरी होती है. यह स्थल हिन्दू ही नहीं मुस्लिम समाज के लोगों में भी खास मान्यता रखता है. यहां नवरात्रा मे मेले का भी आयोजन रखा जाता है जिसमे मुस्लिम परिवार भी दर्शन करने जाते है. यहां दो दिन...

रायमाता के चमत्कार

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 कहा जाता है कि गांगियासर की रायमाता बड़ी ही लोकप्रिय और कलियुग की चमत्कारी देवी के रूप में प्रसिद्ध हुई है। लोक में रायमाता की कुछ चमत्कार-कथाएं प्रसिद्ध हैं। मन्दिर का प्रथम यह चमत्कार प्रसिद्ध है कि एक बार इस गांव में एक चोर ने किसी ग्रामीण के एक बैल को चुरा लिया। बैल के मालिक को पता चला कि  चोर बैल के साथ मन्दिर के पास टिका हुआ है। वह अपने साथ ग्रामवासियों को लेकर चोर को पकड़ने के लिए मन्दिर की ओर चल पड़ा। चोर बैल को मन्दिर के पास एक पेड़ से बांधकर मन्दिर में जाकर माता की आराधना व दया की प्रार्थना करने लगा। चोर की करुण पुकार सुनकर करुणामयी देवी ने बैल को गाय के रूप में परिवर्तित कर दिया। जब ग्रामवासियों ने गाय को देखा तो वे वापस लौट गए। चोर भी गाय को छोड़कर वहां से चला गया। तब से यह कहावत प्रचलित हो गई ” जय जननी मातेश्वरी गांगियासर की राय, भक्तजन संकट हरो, करी बैल से गाय”। एक अन्य चमत्कार के अनुसार एक बार मीर खान पठान ने गांगिायासर ग्राम लूटने के लिए फौजो से घेर लिया तो ग्रामीण सन्त सेवापुरी महाराज की शरण मे पहुॅच कर संकट से बचने की प्राथना करने लगे। सन्त ने फौज का सामना करने क...

रायमाता का इतिहास व प्राकट्य कथा

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  रायमाता की प्राकट्य कथा  श्रुति के अनुसार 380 वर्ष पूर्व ग्राम के दक्षिण की ओर ऊॅचे टीले पर सेवापुरी नामक तपस्वी सन्त रहते थे। जिन्हो ने जिवित समाधी लीथी। अचानक पृथ्वी वही एक निश्चित स्थान पर कम्पित होने लगी और कुछ ही गहराइ से व.सं.1600 मे दुर्गामता की मूर्ति प्रकट हुई। उसी समय आवाज आयी कि मै रायमता हूॅ,तुम मेरी पूजा करो। बस क्या था यह खबर आग कि तरह गांव मे ही नही अपितु आस पास के गांवो तक फैल गई। देवी के दर्शन करने के लिए हजारो ग्रामीण वहां पहुॅच गये। बाबा सेवापुरी जी के साथ सभी पे पूजा अर्चना कर वही देवी के मंदिर की स्थापना कर दी। तत्कालीन शासक देवदत भी वहां पहुॅच गये। तत्पश्चात उसी मंदिर को भव्य रूप देने मे ग्राम के कानोडिया परिवार का योगदन शुरू होगया। लोक श्रद्धा के अनुसार यही रायमता लोकप्रिय और कलियुग की चमत्कारी देवी के रूप मे प्रसिद्ध होगइ्र।गांव के तत्कालीन शासक देवदत्तजी को देवी प्रतिमा के प्रकट होने की सूचना मिली तो उन्होंने यहाँ मन्दिर बनवा दिया बाद में गांव के ही कानोडिया परिवार ने मन्दिर को विस्तार दिया। माता जी के मेले मे विशेष आक्रषर्ण का केन्द्र दूर दराज से आय...